रविवार, 21 जनवरी 2018

कविता : हवा चली

" हवा चली "

 हवा चली , हवा चली,
सर - सर  हवा चली | 
पत्ते गिराया धूल उड़ाया,
पानी में भी लहर उड़ाया | 
उस लहर से गांव डुबाया,
तब जाकर समझ में आया | 
लहर से बच्चो गांव बचाओ,
बचाकर नाम कमाओ | 
हवा चली , हवा चली ,
सर सर करती हवा चली |   

नाम : समीर कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं समीर कुमार जो की कक्षा 7th के विद्यार्थी हैं और इलाहबाद के रहने वाले हैं | गाना गए लेते हैं | 

कविता युवा दिवस

" युवा दिवस "

युवा दिवस तालियों से नहीं,
बहुत हौशलों से मनाओ |  
जीवन सम्हालने  की एक, 
जीवन में नया रह बनाओ | 
मिठाइयां खाने और खिलने,
से नहीं सम्हलती है जिंदगी |  
केवल सोचने अनुमान से नहीं,
 बदलती है ये अपनी जिंदगी |  
सूरज जैसे ही है चमकना, 
चंदा की तरह शीतल करना | 

नाम :  नितीश कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह है नितीश कुमार जो की बिहार के नवादा जिले से यहाँ पढ़ने के मकसद आये हुए हैं | पढ़ाई में बहुत अच्छा प्रदर्शन करते है | टेक्नोलॉजी में बहुत माहिर है और और करिअर भी टेक्नोलॉजी में ही बनाना चाहते हैं | 

शनिवार, 20 जनवरी 2018

कविता : घूमने की आयी बारी

" घूमने की आयी बारी "

घूमने की आयी बारी, 
घूमेंगे हम दुनियाँ सारी |
दिल्ली , असम जाएंगे,
वहाँ के फल हम खाएंगे | 
नए - नए जगह हम घूमेंगे,
दोस्तों को हम बताएंगे | 
दुनियाँ की सैर हम कराएंगे,
दुनियाँ घूमने हम जाएंगे | 
घूमने की आयी है बारी,
घूमेंगे हम दुनियाँ सारी |  

नाम : कुलदीप कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ से यहाँ रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे है | पढ़ाई बहुत मन लगाकर करते हैं बड़े होकर एक नेक इंसान बनना चाहते हैं | डांस भी बहुत अच्छा कर लेते हैं | 

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

कविता : हमारे बापू थे महान

" हमारे बापू थे महान "

 हमारे बापू थे महान,
भारत में बनाये मकान | 
जब बापू की गई आवाज ,
अंग्रेजो के कानों कान | 
गुलाम बना लेने की ली ठान, 
जब न सह पाया सबकी मान | 
चलनी पड़ी आंदोलन की यान,
हमारे बापू थे महान |  

नाम : संतोष कुमार , कक्षा : 4th , अपनाघर 

बुधवार, 17 जनवरी 2018

कविता : रौशनी

" रौशनी " 

अँधेरी रात में कहीं से,
रौशनी आ रही थी | 
 ये ही वो रौशनी है जो, 
मेरी जिंदगी को दिखा रही थी | 
ये जुगनू जैसा जलता, 
मेरी जिंदगी में|  
हर मोड़ के साथ चलता,
ये कोई रौशनी नहीं |  
ये तो जिंदगी का मार्ग है, 
बस इस पर चलना मेरा | 
काम है आगे देखना, 
इसका बड़ा परिणाम है | 
नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

कविता : धैर्य रख मेरे दोस्त

" धैर्य रख मेरे दोस्त " 

धैर्य  रख मेरे दोस्त, 
हिम्मत तुझमें भी आएगी | 
कोशिश कर मेरे दोस्त,
 दुनिया बदल जाएगी |  
एक दिन होगा वो, 
जब दुनिया तुझको सुनेगी | 
तेरे हिम्मत परवानों के गीत, 
किताबों में भी बनी जाएगी |  
हर एक कीमती शब्द तेरा, 
जुबान से लेकर दिल से निकलती है |  
मन में धैर्य रखे रहना क्योंकि, 
किश्मत तो आजमाने की है | 

नाम : प्रान्जुल कुमार , कक्षा :8th , अपनाघर 

सोमवार, 15 जनवरी 2018

कविता : जिंदगी का प्यासा सागर

" जिंदगी का प्यासा सागर "

जिंदगी का प्यासा सागर, 
बहुत ही गहरा होता है | 
उम्मीदों से भरा होता है, 
मंजिल से भी दूर होता है |  
कहते हम प्रेम का सागर, 
गौर करें तो है महासागर | 
गहराई में है इसकी दुनियां, 
फिर भी है इसमें लाखो कमियां | 
सात सागरों में बता है सागर, 
बहुत गहरा होता है सागर | 

नाम : विशाल कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर


कविता : " शोर मचाते हैं मोर "

" शोर मचाते हैं मोर " 

शोर मचाते हैं मोर, 
बारिश में करते हैं शोर |  
सुन्दर -२ नाच दिखाते, 
इंसानों का दिल बहलाते |  
बारिश जब आ जाती है, 
नाच दिखकर गाते मोर | 
पंख फैला मचाते शोर, 
जानवरों का भी मन बहलाते | 
मेंढक दादा भी शोर मचाते |  
जब भर जाती है नाली, 
पिलो भाई ठंडा पानी |  
जब जब नाच दीखते नारिश,
समझलो भाई आ गई बारिश |

नाम : समीर कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं समीर जो की इलाहबाद जिले से कानपूर जिले में पढ़ाई के मकसद से आये हुए हैं | पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं साथ ही साथ गण गाने के बहुत शौकीन हैं | पढ़ लिखकर एक अच्छे इंसान बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं |      

शनिवार, 13 जनवरी 2018

कविता : बड़ी सोच

" बड़ी सोच "

छोटे हैं तो क्या हुआ, 
हमारी  सोच बड़ी है | 
करते नहीं हम छोटे काम, 
करते रहते हैं बड़े काम होता 
 सोच पाते नहीं हम, 
बड़ा कर दिखलाते हम | 
सोच हमारी ऊँचे अरमानों के,
खुले आकाश में बहती है | 
सूरज की तरह चमकती है, 
क्योंकि छोटा सोच पाते नहीं | 
बड़े काम दिखलाते हम | | 

नाम ; विशाल , कक्षा : ८थ , अपनाघर  

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

कविता : भौ - भौ करते कुत्ते आए

" भौ - भौ करते कुत्ते आए " 

भौ - भौ करते कुत्ते आए,
खरगोश बेचारा लगे कापने | 
कुत्ते का झुण्ड करीब आया,
खरगोश का दिल घबराया | 
कान उठाकर वहाँ से भागा,
पीछे पड़ गए कुत्ता दादा | 
दोनों की है बात निराली,
खरगोश भागने में है माहिर | 
पर कुत्ता दादा है शिकारी  |  

नाम : अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर


 कवि परिचय : यह हैं अखिलेश जो की बिहार राज्य से आये हुआ है | कक्षा 7th में ही कवितायेँ  लिखना शुरु कर दिया और आजकल अच्छी कवितायेँ लिखते हैं | खेल भी बहुत अच्छा खेलते हैं | पढ़ लिखकर अपने घर और समाज की सेवा करना चाहते हैं | 

गुरुवार, 11 जनवरी 2018

कविता : हर नारी जीना चाहती है

" हर नारी जीना चाहती है " 

हर कोई नारी जीना चाहती है,
अपनी मंजिल पाना चाहती है | 
जीवन में खुशियाँ लाना चाहती है,
हर कोई  नारी जीना चाहती है | 
अपने  हक़ के लिए लड़ना चाहती है, 
अपने ख्वाइश पूरा करना चाहती है |  
अपने जी में कुछ करना चाहती है,
हर कोई नारी जीना चाहती है |  

नाम : संजय कुमार , कक्षा : 7th, अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं संजय कुमार जो की आजकल ये बहुत अच्छी कवितायेँ लिख रहे हैं पहले ऐसा नहीं था | आजकल इनकी कविताओं से कुछ न कुछ मेसेज निकलता है | पढ़ाई में थोड़ा कमजोर हैं फिर भी खूब मेहनत करते हैं हमें उम्मीद है की ये भविष्य में कुछ अच्छा करेंगे | झारखंड के रहने वाले हैं |