सोमवार, 4 दिसंबर 2017

कविता ; बाल मजदूर

"बल मजदूर "

नाजुक हाथों ने क्या कर दिया पाप, 
जन्म से ही दे दिया कामों का वनवास |
कलियों जैसी खिलने वाले उस मासूम, 
जिंदगी को कर दिया तबाह |
हर बचपन के लम्हों को, 
हर सजाये हुए सपनों को |
दो मिनुट में कर दिया राख,
दर्दनाक जिंदगी उसे तडपा दिया |
बचपन के खिलौनों की जगह,
 जिंदगी से लड़ना सिखा दिया | 
पेन ,किताब और कॉपी की जगह, 
कम का बोझ इर पर लाद दिया |

नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7 , अपनाघर 

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

कविता :जब मैं सुबह जागा

"सुबह - सुबह जब मैं जागा "

सुबह - सुबह जब मैं जागा, 
बिस्तर छोड़कर व्यायाम को  भागा | 
तब सुबह के बज रहे थे चार, 
चिड़ियाँ उड़ी पंख को पसार | 
मानों प्रकति कह रही हो,
क्या घूमना चाहते हो संसार | 
मैं तो था बिल्कुल तैयार, 
लेकिन सपना टूटा तो 
हो गया सब बेकार | | 

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर

कवि परिचय : यह हैं देवराज कुमार जो की बिहार के नवादा जिले से आये हुए हैं | इन दो - तीन सालों में इन्होने बहुत अच्छी कविताएं लिखना सिख गए हैं और अभी चाहतें हैं की और भी सीखें | ये डांस भी बहुत अच्छा कर लेते हैं | 

शनिवार, 25 नवंबर 2017

कविता : उठो जवानों

" उठो जवानों " 

कब तक सोए रहोगे जवानों, 
अब तुमको उठ कर दिखलाना है | 
चाहे हो मुसीबतों का पहाड़, 
इससे भी ऊँची छलांग लगाना है | 
अपने हक़ के हक़दार बानों, 
गलतियों से तुमको लड़ना है | 
शरहद के पार होकर भी, 
एक टारे की तरह चमकना है | 
अब मत सोओ आलस के बन्दों, 
अब तुमको भी लड़ना है | 

कवि :प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 

कवि परिचय : छत्तीसगढ़ के रहने वाले प्रांजुल ने लगभग बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कविता बलिखने का गुड़ अपने भइआ लोगो से सीखा है| पढ़ाई में अच्छे होने के साथ - साथ गतिविधियों भी बहुत अच्छे हैं | हमें उम्मीद है की आने वाले समय में एक महँ कवि बनेगें | 

कविता: ठंडी का मौसम आया

 " ठंडी का मौसम आया "

ठंडी का मौसम आया है  
उनींदार कपड़ें है लाया है | 
बिना स्वेटर लगती है ठंडी, 
पहनो टोपी पूरी ठंडी | 
ठिठुर रहे हैं हाथ हमारे, 
चलो बैठते हैं आग के किनारे | 
कोहरा भी होता है इस दिन,
देख कर चलो भईया नहीं तो 
भिड़ोगे  किसी दिन | | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | अपनाघर में रहकर पिछले तीन सालों  से पढ़ाई कर रहे हैं | कवितायेँ बहुत अच्छी लिख लेते हैं तथा डांस भी बहुत अच्छा कर लेते हैं | हमेशा मुस्कुराते रहते हैं | 

बुधवार, 15 नवंबर 2017

कविता : नएपन के ख़ुशी में

 " नएपन के ख़ुशी में "

हमें गुदगुदाओ इस नयापन के ख़ुशी में ,

निकलो उस दुखी दहलीज़ से | 
जिसमें गुदगुदी के लम्हें हो, 
जिओ ख़ुशी के पक्षिओं की तरह,
जिस पक्षी के कुछ गीत हो | 
हमेशा तुम चहचहाना सीखो, 
हर दिन को  खाश बनाना सीखो | 
उन दिनों की यादों को भूल न पाय, 
याद  करो फिर भी याद  दिलाय |  
यूँही नए पल के लम्हें जो बीते, 
गुमसदी के पलों को दरिया में दफना दे |

कवि : राज कुमार , कक्षा : 8th ,अपनाघर 



कवि परिचय : यह हैं राज कुमार जो की कक्षा 8 के विद्यार्थी हैं | 2013 से यहाँ रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | वैसे तो यह हमीरपुर के निवासी हैं  पढ़ाई में तो अच्छे हैं और कवितायेँ भी अच्छी लिखते हैं | 


सोमवार, 13 नवंबर 2017

कविता : दिवाली आयी खुशियाँ हज़ार लायी

" दिवाली आयी खुशियाँ हज़ार लायी "

दिवाली आयी खुशियाँ हज़ार लायी,, 
उन दीपों के बीच , वो खूब 
सुन्दर ख्यालों के साथ, 
जगमगाते बत्तियों के पास | 
सालों  -साल होता है पावन, 
इस त्योहार का इंतज़ार | 
फिर होता है दीपों का अकाश में,
 चमचमाते सितारे करते हैं दीदार |  
दिवाली आयी खुशियाँ हज़ार लायी .....  

कवि : राज कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 

Poem :Try to fly

" Try to fly " 

When a little bird try to fly,
fall down many times but not shy.
till it rise up and then try. 
but its little uniques,
not help him to fly.  
A beautiful excitement,
which is in his mind.
when it see any bird flying,  
its mother never teach him to fly, 
but it has to learn by its trying........   

Poet : Devraj kumar , class: 7th, Apnaghar 

 Introduction : He is Devraj kumar belongs to Bihar state and settle in Apnaghar for study. He is always interested in dance , poem writting ,and sports as well as drama etc. He has always smile on his face .

शनिवार, 11 नवंबर 2017

poem : Beneath the Sky

" Beneath the Sky " 
We surprised beneath the sky,
why we can not go so high .
would be also have feather, 
so that we can fly together.
to sit on the clouds, 
talk a lot and clear all doubts. 
we face the first ray of sun, 
then release the ray of bun. 
no more problems and tension,
all bad deads fprgot, turn off television. 

Poet : Pranjul kumar , Class : 8th, Apnaghar 


Introduction : He is Pranjul from Chhattisgarh and he is well known for its poem , games ,drawing etc.He is good in study as well as mental skill .He joined Apnaghar for to change his family background from worst to better .

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

कविता : पढ़ाता है तू,

" पढ़ाता है तू, " 

अनपढ़ों को पढ़ाता है तू, 
सबके दिल को छू जाता है तू | 
इस देश के वासियों को, 
अच्छी बातें है बताता तू | 
हिंसा तेरे बस में नहीं ,
अहिंसा का पाठ पढ़ाता | 
अगर तू ये काम न करता,
गाँधी नहीं कहलाता तू | 

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर

कवि परिचय : यह हैं समीर कुमार जो की इलाहबाद से अपनाघर में पढ़ाई के लिए आएं हैं | संगीत इनका मनपसंद चीज़ है | कवितायेँ लिखने के साथ -साथ अच्छे -अच्छे गीत भी लिखा करते हैं | माता -पिता की ख्वाहिश है की ह पढ़ लिखकर कुछ समाज के लिए काम करे |  

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

POEM : Don't change intention

" DON'T CHANGE INTENTION "

If the people is laughing at you.
it's means you are doing something new.
They would be compelled to change view.
and give idea to you.
would be thought I am crazy.
and it will be make you to more lazy.
but you there keep patient.
and pay attention.
Don't change there your intention.

POET : DEVRAJ KUMAR , CLASS : 7TH , APNAGHAR

Introduction : he is Devraj from Bihar state . Always read for an competition whatever of dance or poetry .Always smile is on his face and better in any game and favourite game is volleyball and cricket 

कविता: तितली के सुनहरे पंख

" तितली के सुनहरे पंख " 

 तितली के सुनहरे पंख,
देखकर मन बहल जाए | 
छुओ तितली के कोमल पंखों को ,
तो टिम -टिमाते हुए उड़ जाए | 
सुनहरे से मौसम के पल में,
तितली की रंगों की रौशनी | 
उनके सुंदर पंखों से निकलती है,
पंखो में कुछ जादू है जिससे | 
जुगनू के रंग जैसे बदलती है,
बाग - बगीचों में तितली  रंग | 
सुनहरे से तारे टिमटिमाते हैं,
थोड़ी सी किरण तितली पर पड़ती है | 
कोमल से पंख टिमटिमाकर बताती है,
पंख हिलाकर पास चली आती है | 
तितली के सुनहरे रंग संसार में बिखर जाए 
फिर से नई एक दुनियाँ बन जाए | 

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 6TH ,अपनाघर

कवि खेल में बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं |  परिचय : यह है सनी जो की बिहार के नवादा जिले से आकर अपनाघर में अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे है | ये चाहते है की मैं अपने घर की लाइफ स्टाइल बदलूँगा | जिससे की मेरा परिवार और खुशहाल व खुश होकर जिए |