शनिवार, 9 सितंबर 2017

कविता : आसमान को छूना

" आसमान को छूना "

मैं छूना चाहता हूँ आसमान को ,
हर मुश्किल  की हर बाधाओं  को | 
टक्कर देकर आना चाहता हूँ, 
आसमान में चमकते तारों को| 
हमेशा अपना रौशनी बिखराये 
रखते हैं निर्धन हो या धनि, 
प्रेणना के जलवे फैलाये रखते हैं | 
हर एक को साथ लेकर चलना, 
वे द्रश्य रखते हैं |  

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर

कवि परिचय : यह विक्रम कुमार है जो की बिहार से आए हैं | यह हर काम में अपना बहुत एफर्ट देते हैं चाहे खेल कूद में या फिर पढ़ाई में हो | हर दम चेहरे में ख़ुशी रहती है | यह रेस में बहुत ही तेज से भागते हैं | कवितायेँ इनकी बहुत ही अच्छी होती हैं |  

कविता : नोटबन्दी

" नोटबन्दी "

लोग हो गए हैं बेहाल, 
पुराने नोटों का हुआ हलाल | 
अमीर हो गए बेमिशाल ,
गरीब हो गए लालम - लाल | 
क्योंकि पुराने नोटों के हो गए जमाना, 
लोग एक - दूजे के हुए परमाना | 
मोदी ने किया पुराने नोटों का खात्मा, 
काले  धंदे वालों की शांत हुई आत्मा | 

कवि : कामता  कुमार , कक्षा : 6th ,अपनाघर
 

कवि परिचय : यह कामता कुमार हैं ये बिहार  से आये हुए हैं |  अपनाघर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं | क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है जितना की कविता लिखने में है | कक्षा 6th के छात्र हैं | इनका परिवार ईंट भट्ठों में मज़दूरी का कार्य करते हैं | 

शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

कविता :हौशलों से भरा हो

" हौशलों से भरा हो "  

मेरे जीवन की राह में ,
हौशलों से भरा हो |
 मेरी यही ख्वाईश है, 
मेरा जीवन हौशलों से भरा हो | 
मेरे जीवन की राह में ,
हर तूफान से मैं उलझा हूँ 
हर मुशीबत से मैं लड़ूँ |
 मेरे जज्बातों को बाहर आने का,
 इंतज़ार मैं बड़े उत्साह से करूं |  
 मेरा जीवन की राह में, 
हौशलों से भरा हो | 

कवि :संजय कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं संजय कुमार हाल ही में कवितायेँ लिखना शुरू किया है और जल्द ही ये कविकार बन गये हैं | अपनाघर में रहकर पढ़ाई कर हैं | हमेशा मुश्कुराते रहते हैं | स्पोर्ट्स में बहुत अच्छे हैं | 

कविता :सावन

 " सावन "

सावन का है मौसम आया,
तालाब में है पानी भर आया | 
 बच्चे नहाते तालाब में ,
चिड़िया चहके बैग में |  
चरों तरफ कीचड़ - कीचड़,
लोग रहते हैं भीतर - भीतर | 
सावन का है मौसम आया ,
तालाब में पानी भर आया | 

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं अखिलेश कुमार जो की बिहार राज्य से बिलोंग करते हैं | यह पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | गणित में बहुत समय बिताते हैं | कविता बहुत ही कम लिखते हैं लेकिन जब लिखते हैं तब बहुत ही अच्छा लिखते हैं | इनसे घरवालों की बहुत उम्मीदें हैं | 

मंगलवार, 5 सितंबर 2017

कविता : आसमान को छूकर आएंगे

" आसमान को छूकर आएंगे"  

हमें भी जाना है आसमान में 
इस सितारों के संसार में | 
ये जुगनू जैसे सितारों को 
    हम पकड़कर और छूकर आएंगे, 
    पृथ्वी को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे | 
जगह - जगह से हम कूड़ा उठाएंगे,
    भारत को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे |  
हमें भी जाना है आसमान में ,
इस सितारों के संसार में | |  
कवि : कुलदीप कुमार ,कक्षा :6th  ,अपनाघर 
कवि परिचय : यह कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ से आय हुआ हैं | इनको डांस करना बहुत पसंद है | कक्षा में हमेशा ध्यान देते हैं | इनके माता - पिता गृह निर्माण का कार्य करते हैं | हमें उम्मीद है की आगे चलकर यह अपनी बेहद रचना भरी कवितायेँ लिखेंगे | 

कविता : स्वच्छ भारत

" स्वच्छ भारत "

चलो - चलो यारा कुछ नया करें ,
गन्दगी को इस देश से साफ करें | 
भूलने की बीमारी को छोड़कर,
नदियों से नहर को मोड़कर |  | 
चलो - चलो यारों कुछ नया करें, 
इस देश को गन्दगी से मुक्त करें | 
न लगा सकते हो झाड़ू, 
तो लगाओ पेड़ मेरे यारो | 
गन्दगी साफ होगी सचमुच, 
साफ हो जाएंगी दिशा चारो| 
चलो - चलो यारो कुछ नया करें | |

  कवि : समीर कुमार , कक्षा: 7th , अपनाघर


कवि परिचय : यह समीर कुमार हैं |गाना  इनका पसंदीदा चीज है जिसको हर समय गुनगुना रहते हैं | कवितायेँ भी बहुत अच्छे लिखते है  | इलाहबाद के रहने वाले हैं इनके माता - पिता को इनसे बहुत सारी उम्मीदें हैं  क्योंकि यह पहली जनरेसन है जो पढ़ाई कर रही है | 

रविवार, 3 सितंबर 2017

कविता : आज़ाद

" आज़ाद "  

आज़ाद रहना है मुझे 
आज़ाद जीना है मुझे | 
कुर्बानियों से न घबराते, 
ख़ुशी - ख़ुशी अपने जान दे जाते | 
हर मुश्किल का सामना कर पाते, 
हौशले को कभी न हारने देते|  
 आज़ाद ही नाम कहलाते,
आज़ाद जीने है मुझे | 
आज़ाद मरना है मुझे | | 
कवि : नितीश कुमार ,कक्षा : 7th , अपनाघर 
कवि परिचय : यह नितीश कुमार बिहार के गया जिले से हैं | यह  पढ़ाई मेंबहुत अच्छे हैं हमेशा स्पेस के बारे में रूचि रखते हैं और एक अस्ट्रोनॉमर बनना चाहते हैं | कविता भी बहुत अच्छे से लिखते हैं | यह बहुत ही गंभीर रहते हैं |  

शनिवार, 2 सितंबर 2017

कविता : आओ नया संसार बनाएं

"आओ नया संसार बनाएं "

आओ नया संसार बनाएं ,  
इस धरा को फिर दोहराएं | 
अत्याचार को मार भगाएं, 
सत्य अहिंसा को अपनाएं |  
फैक्ट्रियाँ सारी बंद करवाएं,
प्यार भावना को हम अपनाएं | 
एक दूजे के तरफ ले जाएं, 
आओ नया संसार बनाएं | 
इस धरती को सुन्दर बनाएं | | 

कवि : संजय कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय : ये हैं संजय कुमार झारखण्ड से हैं | यह मेहनती होने के साथ - साथ पढ़ाई भी करते हैं | कवितायेँ बहुत ही कम लिखते हैं लेकिन लिखते हैं तो बहुत ही ला जवाब | क्रिकेट बहुत पसंद हैं जिसमे ये एक गेंदबाज की भूमिका निभाते हैं | इनकी कविताओं में कुछ सनसनी भरी चीजे होती हैं | 

शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

कविता : काश मैं चिड़िया बन जाऊँ

"काश मैं चिड़िया बन जाऊँ " 

काश मैं चिड़िया बन जाऊँ, 
दूर - दूर तक सैर लगाऊँ | 
रोज़ सुबह पंख फैलाऊँ, 
दूर - दूर से दाना लाऊँ | 
दो दिन उसको मैं चलाऊँ, 
कोई पकडे तो फुर्र हो जाऊँ|  
काश मैं चिड़िया बन जाऊँ | | 

कवि : कामता कुमार , कक्षा : 6th ,अपनाघर
 कवि परिचय : यह कामता कुमार बिहार के गया जिले से है  | यह अपनाघर घर में चार साल से रहकर अपनी पढ़ाई को और मजबूत कर रहे हैं | यह पढ़ाई के साथ - साथ कवितायेँ ,कहानियां भी लिखते है  | इनको क्रिकेटखेलना बेहद पसंद है | घर में अपने माता - पिता के कामों में भी हाथ बटाते हैं | 

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

कविता :पंद्रह अगस्त

 " पंद्रह अगस्त " 

आओ चले पंद्रह अगस्त मनाए ,
सारे हिंदुस्तान में ध्वज लहराए | 
सबको बताएं तिरंगा है शान हमारा, 
पंद्रह अगस्त का दिन खाश है हमारा |  
स्वतंत्रता सेनानी का अरमान है हमारा,
हिंदुस्तानी बच्चों का पैगाम है हमारा,
 स्वतंत्रता दिवस पर खुशहाल देश हो हमारा | |

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : मैं विक्रम कुमार हूँ | मेरे माता - पिता बिहार के रहने वाले हैं | मैं अपनाघर में रहता हूँ जहाँ मेरी पढ़ाई को कुछ नया मोड़ मिल रहा है जिससे मैं अपने सपनो को सच कर दिखा सकता हूँ |  मैं अपनी कविताओं में जोश भरे देशभक्ति के लिए कविता लिखता हूँ | 

बुधवार, 30 अगस्त 2017

कविता : यह राही की आवाज़ है

" यह राही की आवाज़ है
यह राही की आवाज़ है,
कह राही है पुकारकर | 
आशा मेरा मंजिल है, 
संघर्ष करना मेरा रास्ता |  
धैर्य ही मेरी  संभावना, 
बस यही है मुझको कहना | 
दूर है मंजिल ,तो दूर ही सही,,
रस्ते में काँटे है ,तो काँटे ही सही | 
वह सफलता ही क्या, 
जो सरलता से मिल जाये | 
वह राही क्या, 
जो कठिनाइयों से पीछे हठ जाये |

कवि : अखिलेश कुमार ,कक्षा : 7th , अपनाघर  

कवि परिचय : मैं अखिलेश कुमार अपनाघर में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ | मेरा माता - पिता ईंट भठ्ठों में मजदूरी का कार्य करते हैं | मुझको कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | मैं बिहार से हूँ |