शनिवार, 9 सितंबर 2017

कविता : आसमान को छूना

" आसमान को छूना "

मैं छूना चाहता हूँ आसमान को ,
हर मुश्किल  की हर बाधाओं  को | 
टक्कर देकर आना चाहता हूँ, 
आसमान में चमकते तारों को| 
हमेशा अपना रौशनी बिखराये 
रखते हैं निर्धन हो या धनि, 
प्रेणना के जलवे फैलाये रखते हैं | 
हर एक को साथ लेकर चलना, 
वे द्रश्य रखते हैं |  

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर

कवि परिचय : यह विक्रम कुमार है जो की बिहार से आए हैं | यह हर काम में अपना बहुत एफर्ट देते हैं चाहे खेल कूद में या फिर पढ़ाई में हो | हर दम चेहरे में ख़ुशी रहती है | यह रेस में बहुत ही तेज से भागते हैं | कवितायेँ इनकी बहुत ही अच्छी होती हैं |  

कविता : नोटबन्दी

" नोटबन्दी "

लोग हो गए हैं बेहाल, 
पुराने नोटों का हुआ हलाल | 
अमीर हो गए बेमिशाल ,
गरीब हो गए लालम - लाल | 
क्योंकि पुराने नोटों के हो गए जमाना, 
लोग एक - दूजे के हुए परमाना | 
मोदी ने किया पुराने नोटों का खात्मा, 
काले  धंदे वालों की शांत हुई आत्मा | 

कवि : कामता  कुमार , कक्षा : 6th ,अपनाघर
 

कवि परिचय : यह कामता कुमार हैं ये बिहार  से आये हुए हैं |  अपनाघर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं | क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है जितना की कविता लिखने में है | कक्षा 6th के छात्र हैं | इनका परिवार ईंट भट्ठों में मज़दूरी का कार्य करते हैं | 

शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

कविता :हौशलों से भरा हो

" हौशलों से भरा हो "  

मेरे जीवन की राह में ,
हौशलों से भरा हो |
 मेरी यही ख्वाईश है, 
मेरा जीवन हौशलों से भरा हो | 
मेरे जीवन की राह में ,
हर तूफान से मैं उलझा हूँ 
हर मुशीबत से मैं लड़ूँ |
 मेरे जज्बातों को बाहर आने का,
 इंतज़ार मैं बड़े उत्साह से करूं |  
 मेरा जीवन की राह में, 
हौशलों से भरा हो | 

कवि :संजय कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं संजय कुमार हाल ही में कवितायेँ लिखना शुरू किया है और जल्द ही ये कविकार बन गये हैं | अपनाघर में रहकर पढ़ाई कर हैं | हमेशा मुश्कुराते रहते हैं | स्पोर्ट्स में बहुत अच्छे हैं | 

कविता :सावन

 " सावन "

सावन का है मौसम आया,
तालाब में है पानी भर आया | 
 बच्चे नहाते तालाब में ,
चिड़िया चहके बैग में |  
चरों तरफ कीचड़ - कीचड़,
लोग रहते हैं भीतर - भीतर | 
सावन का है मौसम आया ,
तालाब में पानी भर आया | 

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं अखिलेश कुमार जो की बिहार राज्य से बिलोंग करते हैं | यह पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | गणित में बहुत समय बिताते हैं | कविता बहुत ही कम लिखते हैं लेकिन जब लिखते हैं तब बहुत ही अच्छा लिखते हैं | इनसे घरवालों की बहुत उम्मीदें हैं | 

मंगलवार, 5 सितंबर 2017

कविता : आसमान को छूकर आएंगे

" आसमान को छूकर आएंगे"  

हमें भी जाना है आसमान में 
इस सितारों के संसार में | 
ये जुगनू जैसे सितारों को 
    हम पकड़कर और छूकर आएंगे, 
    पृथ्वी को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे | 
जगह - जगह से हम कूड़ा उठाएंगे,
    भारत को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे |  
हमें भी जाना है आसमान में ,
इस सितारों के संसार में | |  
कवि : कुलदीप कुमार ,कक्षा :6th  ,अपनाघर 
कवि परिचय : यह कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ से आय हुआ हैं | इनको डांस करना बहुत पसंद है | कक्षा में हमेशा ध्यान देते हैं | इनके माता - पिता गृह निर्माण का कार्य करते हैं | हमें उम्मीद है की आगे चलकर यह अपनी बेहद रचना भरी कवितायेँ लिखेंगे | 

कविता : स्वच्छ भारत

" स्वच्छ भारत "

चलो - चलो यारा कुछ नया करें ,
गन्दगी को इस देश से साफ करें | 
भूलने की बीमारी को छोड़कर,
नदियों से नहर को मोड़कर |  | 
चलो - चलो यारों कुछ नया करें, 
इस देश को गन्दगी से मुक्त करें | 
न लगा सकते हो झाड़ू, 
तो लगाओ पेड़ मेरे यारो | 
गन्दगी साफ होगी सचमुच, 
साफ हो जाएंगी दिशा चारो| 
चलो - चलो यारो कुछ नया करें | |

  कवि : समीर कुमार , कक्षा: 7th , अपनाघर


कवि परिचय : यह समीर कुमार हैं |गाना  इनका पसंदीदा चीज है जिसको हर समय गुनगुना रहते हैं | कवितायेँ भी बहुत अच्छे लिखते है  | इलाहबाद के रहने वाले हैं इनके माता - पिता को इनसे बहुत सारी उम्मीदें हैं  क्योंकि यह पहली जनरेसन है जो पढ़ाई कर रही है | 

रविवार, 3 सितंबर 2017

कविता : आज़ाद

" आज़ाद "  

आज़ाद रहना है मुझे 
आज़ाद जीना है मुझे | 
कुर्बानियों से न घबराते, 
ख़ुशी - ख़ुशी अपने जान दे जाते | 
हर मुश्किल का सामना कर पाते, 
हौशले को कभी न हारने देते|  
 आज़ाद ही नाम कहलाते,
आज़ाद जीने है मुझे | 
आज़ाद मरना है मुझे | | 
कवि : नितीश कुमार ,कक्षा : 7th , अपनाघर 
कवि परिचय : यह नितीश कुमार बिहार के गया जिले से हैं | यह  पढ़ाई मेंबहुत अच्छे हैं हमेशा स्पेस के बारे में रूचि रखते हैं और एक अस्ट्रोनॉमर बनना चाहते हैं | कविता भी बहुत अच्छे से लिखते हैं | यह बहुत ही गंभीर रहते हैं |  

शनिवार, 2 सितंबर 2017

कविता : आओ नया संसार बनाएं

"आओ नया संसार बनाएं "

आओ नया संसार बनाएं ,  
इस धरा को फिर दोहराएं | 
अत्याचार को मार भगाएं, 
सत्य अहिंसा को अपनाएं |  
फैक्ट्रियाँ सारी बंद करवाएं,
प्यार भावना को हम अपनाएं | 
एक दूजे के तरफ ले जाएं, 
आओ नया संसार बनाएं | 
इस धरती को सुन्दर बनाएं | | 

कवि : संजय कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय : ये हैं संजय कुमार झारखण्ड से हैं | यह मेहनती होने के साथ - साथ पढ़ाई भी करते हैं | कवितायेँ बहुत ही कम लिखते हैं लेकिन लिखते हैं तो बहुत ही ला जवाब | क्रिकेट बहुत पसंद हैं जिसमे ये एक गेंदबाज की भूमिका निभाते हैं | इनकी कविताओं में कुछ सनसनी भरी चीजे होती हैं | 

शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

कविता : काश मैं चिड़िया बन जाऊँ

"काश मैं चिड़िया बन जाऊँ " 

काश मैं चिड़िया बन जाऊँ, 
दूर - दूर तक सैर लगाऊँ | 
रोज़ सुबह पंख फैलाऊँ, 
दूर - दूर से दाना लाऊँ | 
दो दिन उसको मैं चलाऊँ, 
कोई पकडे तो फुर्र हो जाऊँ|  
काश मैं चिड़िया बन जाऊँ | | 

कवि : कामता कुमार , कक्षा : 6th ,अपनाघर
 कवि परिचय : यह कामता कुमार बिहार के गया जिले से है  | यह अपनाघर घर में चार साल से रहकर अपनी पढ़ाई को और मजबूत कर रहे हैं | यह पढ़ाई के साथ - साथ कवितायेँ ,कहानियां भी लिखते है  | इनको क्रिकेटखेलना बेहद पसंद है | घर में अपने माता - पिता के कामों में भी हाथ बटाते हैं | 

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

कविता :पंद्रह अगस्त

 " पंद्रह अगस्त " 

आओ चले पंद्रह अगस्त मनाए ,
सारे हिंदुस्तान में ध्वज लहराए | 
सबको बताएं तिरंगा है शान हमारा, 
पंद्रह अगस्त का दिन खाश है हमारा |  
स्वतंत्रता सेनानी का अरमान है हमारा,
हिंदुस्तानी बच्चों का पैगाम है हमारा,
 स्वतंत्रता दिवस पर खुशहाल देश हो हमारा | |

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : मैं विक्रम कुमार हूँ | मेरे माता - पिता बिहार के रहने वाले हैं | मैं अपनाघर में रहता हूँ जहाँ मेरी पढ़ाई को कुछ नया मोड़ मिल रहा है जिससे मैं अपने सपनो को सच कर दिखा सकता हूँ |  मैं अपनी कविताओं में जोश भरे देशभक्ति के लिए कविता लिखता हूँ | 

बुधवार, 30 अगस्त 2017

कविता : यह राही की आवाज़ है

" यह राही की आवाज़ है
यह राही की आवाज़ है,
कह राही है पुकारकर | 
आशा मेरा मंजिल है, 
संघर्ष करना मेरा रास्ता |  
धैर्य ही मेरी  संभावना, 
बस यही है मुझको कहना | 
दूर है मंजिल ,तो दूर ही सही,,
रस्ते में काँटे है ,तो काँटे ही सही | 
वह सफलता ही क्या, 
जो सरलता से मिल जाये | 
वह राही क्या, 
जो कठिनाइयों से पीछे हठ जाये |

कवि : अखिलेश कुमार ,कक्षा : 7th , अपनाघर  

कवि परिचय : मैं अखिलेश कुमार अपनाघर में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ | मेरा माता - पिता ईंट भठ्ठों में मजदूरी का कार्य करते हैं | मुझको कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | मैं बिहार से हूँ | 


मंगलवार, 29 अगस्त 2017

Poem: Don't change intension

“Don’t change intension”

IF THE PEOPLE IS LAUGHING ON YOU,
IT’S MEAN YOU ARE DOING SOMETHING NEW.
THEY WILL COMPELLED YOU TO CHANGE VIEW,
AND GIVE IDEA TO YOU.
WOULD BE THINK I CAN CRAZZY,
AND IT WILL BE MAKE YOU MORE LAZY.
BUT YOU PATIENCE AND KEEP ATTENTION,
DON’T CHANGE YOUR INTENSION.

POEM WRITTEN BY : DEVRAJ KUMAR

CLASS:  7TH (a)


Introduction : He is devraj and belongs to Bihar .His parents works in brickyards .He is getting his study from Apnaghar .He is interested in dance and to write poems . He has lots of dream to become something .

शनिवार, 26 अगस्त 2017

poem -We suprised beneath the sky.

why we suprised 

We suprised beneath the sky. 
Why we can not go so high ?
Would be also have feather,
Then we can fly together. 
to sit on the clouds, 
and solve our all doubt .
we face first ray of Sun 
then release the ray of bun 
no any problem and tension
all bad deads forgot,
 switch on television 

Poet - Pranjul kumar , Class -8th , Apnaghar

Introduction -He is Pranjul kumar and he belongs to Chatisgarh .He is from poor family .present time he is living in Apnaghar institute for education .He loves to dance , study listeining music .

शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

कविता :सीखो

सीखो 
फूलों से मुस्काना सीखो, 
चिड़ियों से यूँ गुनगुनाना सीखो | 
हवाओं से लहराना सीखो, 
समंदर से यूँ झूमना सीखो |  
पेड़ों से कुछ पाना सीखो, 
भोरों से गुनगुनाना सीखो | 
हिमालयों जैसी सफलता पाना सीखो, 
सूरज से रौशनी फैलाना सीखो |  
चाँद से चमकना सीखो, 
ये है जीवन की अच्छाई | 
सीखते रहो तुम मेरे भाई | 

कवि - देवराज , कक्षा - 7th , अपनाघर 

कवि परिचय - ये हैं बालकवि देवराज कुमार बिहार के रहने वाले है | कवितायेँ लिखने का शौक कक्षा ५ से था यही कारण है कि  ये आज यहाँ है | इसके परिवार वाले ईंट भठ्ठों के मजदूर हैं | इनको डांस करना बेहद पसंद है | 

शनिवार, 19 अगस्त 2017

कविता- प्यारे बनो ,न्यारे बनो

प्यारे बनो ,न्यारे बनो 

प्यारे बनो ,न्यारे बनो,
सबके दिल के दुलारे  बनो | 
करो सदा अच्छे काम ,
जिससे हो जग में तेरा नाम | 
जागनी  पड़ेगी सारी  रात, 
अगर  पाना चाहते हो अपना पथ |  
समय को कभी नहीं करना बर्बाद, 
हमेशा रखना यही याद | 
जिंदगी का लो पूरा आनंद, 
जैसे जिए थे विवेकानंद | 
कवि -देवराज कुमार , कक्षा - 7th ,अपनाघर 


कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको   डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

बुधवार, 5 जुलाई 2017

कविता :बाल गोपाला

 " बाल गोपाला "

लल्लन के लाल ,बाल गोपाला,
यशोदा का नटखट नंदलाला |
पूरे मथुरा में बजाता मुरली,
बंसी से आवाज़ निकलती सुरीली | 
मन को मोह लेने वाला,
मथुरा का था बाल गोपाल |
सुदामा संग चुराता मख्खन,
अद्भुद प्यारा था वो बचपन |
गौ चराता मुरली बजाता,
राधा संग प्रेम की बंसी बजाता |
गोपाला था तो बहुत कला,
फिर भी था एक सच्चा दिलवाला |
कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th ,अपनाघर 

कवि का परिचय : छत्तीसगढ़ के रहने वाले ये हैं  प्रांजुल | अपनाघर का सदस्य है | इनको कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | अपनी हर एक कविता को मन से लिखते है | खेलने का भी शौक है | इनके परिवार वाले मजदूरी का कार्य करते है | अपनाघर में रह कर ये अपनी शिक्षा को और भी मजबूत बना रहे है | हमें उम्मीद है कि इनकी कविता जरूर सबको पसंद आएगी | 


मंगलवार, 4 जुलाई 2017

"रिमझिम करती बारिश आयी "

रिमझिम करती बारिश आयी ,
कही कही बादल गिरते 
तो कही बम के गोले गिरते ,
ऐसी बारिश में नहाने को बहुत मन 
करता 
कभी कभी मन करता की समुन्दर पर 
तैरु ,
बारिश में खाने का  ,टीवी देखने 
का दिलचस्प रहता मन ,
प्यासी रहती भी बृष और बगीचे 
इनकी प्यास बुझाने बारिश आयी 

                     नाम =राज ,कक्षा =८ 
                        अपना घर 

सोमवार, 3 जुलाई 2017

"गर्मी आती है हर साल "

गर्मी आती है साल
करती है सबको बेहाल
प्रचंड गर्मी और लू का कहर बरपाते
दिन दोपहर में निकलने से  घबराते
तापमान गिरने का नाम न लेता
औसत से अधिक तापमान है जाता
मौसम है नहीं अनुकूल
बाहर निकलने न करना भूल
कोई न लेता नहीं हाल चाल
गर्मी आती है हर साल
करती है  सबको करती बेहाल


         नाम =अखिलेश , class 7th
              अपना घर 

शुक्रवार, 30 जून 2017

"बोझ न बनो दूसरो के सर में "

बोझ न बनो दूसरो के सर में 
ऐसी ख्वाइस है उनकी 
दूसरों की बात भी मनो 
अमल भी करो 
न की किसी दबग करो 
निर्भर रहो अपने आप 
ऐसा करो तुम काम 
कि खास रहो दूसरो के माथे में 
बोझ बनो सिर्फ अपने आप में 
और कुझ करने की ख्वाइस 
रखो अपने ताप में 
दृढ शक्ति से कदम बढ़ा 
"फिर क्या "
मजिल आएगी अपने आप 
से। .. 

                     राज 
                        अपना घर 

गुरुवार, 29 जून 2017

"अनजान  सा .. "


अनजान सा मैं आया था ,
विदवान सा बन गया | 
दुनिया भर की बातें ,
मुझे में भर गया | 
गलत और सही सही को मैं समझा ,
अमीरी गरीबी को मैं परखा | 
मैं घर और दवार समझा, 
मैं भूमि और भूमिका समझा | 
हमारा क्या है तुम्हारा क्या ,
उनको भी मैं समझा लेकिन 
किसी ने | 
माँ की ममता को , 
पिता की पसीने की | 
कीमत नहीं समझा ,

          नाम =देवा ,class 8th ,अपना घर 

जिंदगी एक शब्द नहीं जो

"जिंदगी एक शब्द नहीं जो "

जिंदगी एक शब्द नहीं जो ,
जो चाहे भुला नहीं सकता | 
तेरी मुस्कान में हजारों खुश होते है ,
गरीबों की  जिंदगी बनाते है | 
काश ;मैं भगवान होता ,
जब चाहे इंसान बना लेता | 
मेरी एक सहायता से ,
हजारों को अच्छा बनाता | 
जिंदगी में खुश हजारों लोग होंगे ,
दुःखी  में अकेले होंगे। ...... 



                                                            नाम   -  सार्थक कुमार               
                                                 कक्षा  -    ,अपना घर       

बुधवार, 28 जून 2017

कविता

गर्मियों की छुट्टियों का ख़त्म हुआ जमाना,
सब कुछ भूलकर अब स्कूल है जाना | 
बच्चे करते पढाई आधा, 
पढ़ते कम खेलते है ज्यादा|  
दिन भर मस्ती मन में गस्ती, 
गुस्से में लड़ाई बाद में दोस्ती | 
पढ़ो लिखो खेलो औरखाओ
दिन भर पढ़ो और मौज उड़ाओ | 
क्या कहे अब ये नादान 
इन्हीं को बनना है महान | 

अपना घर 
हॉस्टल 
               

 " पेड़ " 

शाम ,सुबह यह छाया देता,
रात में ये कभी - कभी सोता |  
सूंदर - सूंदर ये फूल देता, 
रस भर -भरकर फल देता | 
फूल को सूंघने में आनंद आता,
जड़ तो अंदर में छिप जाता |  
तना रात दिन खड़ा रहता,
पूरा पेड़ दूप को सहता | 
सुबह-सुबह जब पानी मिलता, 
पूरा दिन खुसी से रहता | 
शाम सुबह यह छाया देता, 
सारी रात खूब सोता | 
नाम : अवधेश कुमार ,कक्षा : 4th , अपनाघर 

मंगलवार, 27 जून 2017

 " कोई कुछ कह रहा है "

कोई कुछ कह रहा है, 
ये हवाएं जो बह रही हैं | 
उड़ती चिड़ियाँ कुछ कह रही हैं, 
छाय बदल भी कुछ कह रहे हैं | 
रात को जुगनू कुछ कह रहा है, 
नीला आसमान कुछ कह रहा है | 
अब ये तारे ,ये जमीं ,ये पौधे, 
ये पूरी दुनियां यही कह रही है | 
हवा और नदियां बह रही हैं, 
क्यों आवाज जहर बन रही है | 
वो पवित्र नदी नाला बन कर, 
क्यों जहर  बनकर बह रही है |
जिंदगी क्यों नरक बन रही है,
रोक लो यारों ये हर कोई कह रहा है  | |

नाम : देवराज कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर। 


कवि परिचय -: यह बिहार के रहने वाले देवराज हैं | इन्होंने एक से एक बढ़कर कविताऍं लिखी हैं | अबतक इन्होनें लगभग ५० -६० कविताऍं लिख चुके हैं | इनको डांस करना बेहद पसंद है | क्रिकेट में छक्के बहुत मारते हैं | हर वक्त कुछ नया सिखने को चाहते है | ये कक्षा सात में पढ़ते है |  अपना घर परिसर में रहकर अपनी शिक्षा को मजबूत बना रहे हैं | इनके माता - पिता ईंट भठ्ठे में बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहे हैं | ये बड़े होकर एक नेक इंसान तथा एक अच्छे खेल के खिलाड़ी बनना चाहते हैं | 

सोमवार, 26 जून 2017

"आशाओं का सूरज निकल रहा हैं  "

आशाओं का सूरज निकल रहा है ,
कामयाबी रास्ते खुल रहें है | 
मंजिल तो  हमारी हो नहीं सकती दूर ,
क्योंकि हमारी सोच बदल रही है | 

हमारी रफ़्तार बदल रहे है ,
हवाओ के जैसे हम चल रहे है | 
अब जल्द ही बदलेगा जहा ,
क्योकि हम बदल रहे है | 
हर बच्चो की ज्ञान देना ,
ये तो माँ -बाप का धर्म बन चुका है | 
उनके जिंदगी  को सवारना ,
ये तो कर्म बन चुका है | 


      नाम =देवा ,class 7th
        अपना घर 

रविवार, 25 जून 2017

कविता :मजबूरी

"मजबूरी " 
दलितों को जिंदगी जीना है मजबूरी,
समाज उनके लिए क्या कर रही 
यह बात पता नहीं किसी को पूरी |  
आर्थिक संकटों की वजह से, 
आ रही बड़ी -बड़ी रुकावटें |  
जिससे जिंदगी के हर राह पर,
खेल  रही मौत की आहट ,
जिंदगी से लड़ लड़कर क्या है जीना,
यह बहादुरी की बात नहीं|  
अपने अधिकार को लड़कर लेना,
शाबाशी की ताज तेरे सर पर सही | 
नाम : विक्रम ,कक्षा : 7th ,अपनाघर  

कवि  परिचय : इनका नाम विक्रम है | ये कविताओं को नरम हाथों से लिखकर उसमें जान फूक देते है | इनको रेस करना बहुत  पसंद है | शांत स्वभाव के विक्रम कुमार हमेशा अपने चेहरे में ख़ुशी रखना पसंद करते है | हमेशा नई  जानकारी को पाने की कोशिश करते रहते है |  इनको एक्टिंग करना पसंद है | 


कविता : "आशा है मुझे बारिश होगी "

"आशा है मुझे बारिश होगी " 

आशा है मुझे बारिश होगी ,
आशा है मुझे कुछ नया होगा  | 
देखने में लगता है कुछ खास ,
काश बादल रुक जाये आज  | 
मेरे आसपास के इस वातावरण,
में हो जाये झमाझम बरसात | 
बारिश के बूँदें को  देखू ,
  बारिश को महसूस  करूँ| 
 उछल कूदकर मैं खूब नहाऊँ  ,
अपने सपने को  खुद सजाऊँ | 
 नाम : राज कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 

कवि का परिचय: राज   "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये हमीरपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 8 th  के छात्र है। राज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।

             
"दिन का तू ख्याल न कर "
दिन का तू ख्याल न कर
सुबह भी होगी शाम भी होगी
वही धूप होगी वही छाव होगी
सूर्य चन्द्रमा के प्रकाश को बस
फेरन होगा

सोमवार, 15 मई 2017

कविता : चाह है दुनियां घूमूं

 "चाह है दुनियां घूमूं "

चाह है मेरी दुनियां घूमूं ,
 हर जगह मस्ती में झूमूँ | 
देखूं मैं नई किरणों का शहर, 
जहाँ न हो दुश्मनों का कहर | 
पद यात्रा से हवाई यात्रा करूँ,
आसमान में जाकर साँसें भरूँ |  
जहाँ - जहाँ भी जाऊँ मैं,
सारे संस्कृति को अपनाऊं मैं | 
ठंडी गर्मी और झेलूं बरसाते, 
घूमूं दिनभर और सारी रातें | 
जहां भी जाऊँ ख़ुशी से झूमूँगा, 
जिंदगी एक है खुल के जीऊंगा | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th ,अपनाघर

कवि का परिचय : छत्तीसगढ़ के रहने वाले ये हैं  प्रांजुल | अपनाघर का सदस्य है | इनको कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | अपनी हर एक कविता को मन से लिखते है | खेलने का भी शौक है | इनके परिवार वाले मजदूरी का कार्य करते है | अपनाघर में रह कर ये अपनी शिक्षा को और भी मजबूत बना रहे है | हमें उम्मीद है कि इनकी कविता जरूर सबको पसंद आएगी | 

" जिंदगी " 

जिंदगी मिली है तो क्यों न जिऊँ, 
कल के दिन में आसमान को छुऊँ |  
अच्छा इंसान बनने के लिए जिंदगी को चुनूं , 
आसमान के रास्ते में पैदल ही चलूँ | 
औरों को ये बात बताऊँ,
सारे समाज को सुनाऊँ | 
जिंदगी मिली है तो क्यों न अच्छे से जिऊँ | 

कवि : ओमप्रकाश कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर हॉस्टल 
 " राही " 

वो राही अब तू क्या,
पथ अपना खो गया  | 
या फिर तू हार कर,
कही अँधेरे में सो गया |  
वो राही अब तू  क्या,
 पथ अपना खो गया | 
मत छोड़ तू अपना लक्ष्य,
 चलते रहना लगातार तुम बस |  
वो अब सुहाना दिन गया,
वो रही तू क्या पथ अपना खो गया | 

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको   डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

रविवार, 14 मई 2017

कविता : फूल


 "फूल"

            सुन्दर -सुन्दर फूल जीना सिखाती है ,
         हर मुश्किलों से लड़ना सिखाती है /
चाहे बाधाएं हो कितनी 
उन बाधाओं से लड़ना  सिखाती है /
काँटों में खिलती है और 
हर जगह महकाती है /
    कुछ -कुछ हमसे कहती है फूल ,
    याद रखना मुझको  जाना भूल /

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

कविता :स्कूल

 " स्कूल "  

स्कूल का दिन आया,
पढ़ने का मौका लाया | 
कॉपी ले जाते है हम ,
बुक से पढ़कर आते हम | 
दिनभर रहते स्कूल में,
 मैडम आती है देर में | 
 बच्चे चिल्लाते रहते हैं,
मॉनिटर शांत करते थक जाते हैं | 
कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा 6th , अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार | ये छतीसगसढ़  राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है| कक्षा 6 th के छात्र हैं | कुलदीप  क्रिकेट के दीवाने है | विराट कोहली के फैन है | कुलदीप को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको कुलदीप  की रचनाएँ पसंद आएँगी

शनिवार, 13 मई 2017

कविता : बच्चे

 " बच्चे " 

बच्चे ही जाने ममता का प्यार,
बच्चे ही जाने मां का संसार | 
हर पल मां रखती हैं ध्यान,
 बच्चे ही समझे मां हैं भगवान|  
बच्चें है भविष्य यहाँ के, 
बच्चे सजायगें भविष्य यहाँ पे| 
 बच्चों की कोई बात नहीं ,
 खेलते और शरारत करतें 
 यही उनकी आदत है बनती | 

कवि : नितीश कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं नितीश कुमार | ये बिहार राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है|  कक्षा 7th के छात्र हैं | नितीश फूटबाल के दीवाने है | लिओन मेसी  के फैन है | नितीश को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको नितीश  की रचनाएँ पसंंद आएँगी 

कविता : अगर मैं होता साधू

"अगर मैं होता साधू " 

अगर होता मैं कोई साधू ,
दिखा देता दुनियां को जादू |
कर लेता प्रदूषण पर काबू ,
मिटा देता प्रदूषण का जादू |
साधुओं जैसा काम मैं करता,
सच्चा जादू की तरह मैं बनता |
नाम कमाता इस दुनियां में,
भर देता कुछ फल झोलिओं में |
जादू का सीख होता है निराला,
सुन लो बच्चो से प्यारा -प्यारा |
बाँट देता बच्चों को जादू ,
अगर मैं होता कोई जादू ,
कर देता प्रदूषण पर काबू |

कवि : समीर कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय :  समीर अपनाघर के सदस्य है |  यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 7th के छात्र है। समीर को गीत गाना और लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, विराट कोहली इनके आदर्श है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी

गुरुवार, 11 मई 2017

कविता : सुन्दर संसार हमारा

"सुन्दर संसार हमारा "

सुन्दर सा संसार  हमारा,
जिस पर बसा है दुनियां सारा | 
ढूंढ आये और जग सारा,
पर नहीं मिला  पृथ्वी जैसा  सहारा | 
हो जाती एक तरफ की रात,
जब -जब पृथ्वी घूमती बार -बार | 
पृथ्वी बनी खुली आसमान में,
तारे दिखते हर रात में | 
पृथ्वी दिखती नीला और हरा, 
क्योंकि इस पर है पानी भरा | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर हॉस्टल 


कवि परिचय : यह हैं नितीश कुमार | ये बिहार राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है|  कक्षा 7th के छात्र हैं | नितीश फूटबाल के दीवाने है | लिओन मेसी  के फैन है | नितीश को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको नितीश  की रचनाएँ पसंद आएँगी 

बुधवार, 10 मई 2017

कविता: पृथ्वी का सहारा

"पृथ्वी का सहारा"

सुन्दर सा संसार हमारा,
लगता है सबसे प्यारा | 
इसको बचा कर  रखना यारा, 
यही मनोकामना है हमारा |  
पानी में भी ढूँढा यारा,
फिर भी न मिला सहारा | 
ढूंढ डाला हमने जग सारा,
फिर मिला पृथ्वी का सहारा |  
ढूंढना बंद हुआ तब हमारा,
जब मिल गया पृथ्वी का सहारा |   

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर 


कवि परिचय : इस कवि का नाम  समीर  है | मन से बिलकुल चंचल और दिल से बिलकुल साफ किस्म के इंसान है | इनको गाना  गाने का बहुत शौक है और अपने गाने को अपने अंदाज़ में लिखते है | क्रिकेट के बहुत बड़े प्रेमी  है |  ये गाना  बहुत अच्छा गाते हैं | इलहाबाद के रहने वाले समीर अपनी पढ़ाई अपनाघर में रह शिक्षा ग्रहण कर रहे है | इनके माता पिता ईंट भठ्ठे में ईंट निकलने का काम करते है | हमें उम्मीद है की अपनी कविताओं के जरिये हम सभी को प्रेरित करते रहेंगे | 
 "DRIZZLING LIGHT "
A drizzling light knock my door,
when I lies on the floor.
Entire room fullfil with light,
The whole life like problem fight.
It brings immortial light,
Make us way with light.
marvelous idea on my mind,
Each and  every of  kind.
Future life with so much light,
darkness becomes bright ,
At once we would catch the light ..........
                      Name : Pranjul kumar , class :8th ,Apnaghar hostel 


poet introduction : He is pranjul and he belongs to chhatisgarh.His parents work in construction site his family background is very poor .He is getting education from Apnaghar assossiation .Pranjul interest in dance , play the cricket Biology,physics and mathematics .His favorite batsman is Virat Kohli .Always smile in his face .We hope that he will write new poems with new inspirations in his future.
                   

मंगलवार, 9 मई 2017

कविता :कोशिश


"कोशिश "

अपने मंजिल को पाने के लिए,
हर तरह की होती है कोशिश | 
रास्ते  चलते -चलते गिर जाओ,
उठकर भी चल न पाओ | 
फिर भी मंजिल को पाने की,
हर तरह की होती है कोशिश | 
जिंदगी में एक सही स्थान पर,
जाना होता है जरूरी | 
 तभी तो समाज में कहेंगे ,
कोशिश होती है जरूरी | 
कवि : विक्रम कुमार ,कक्षा ; 7th  अपनाघर हॉस्टल 


कवि  परिचय : इनका नाम विक्रम है | ये कविताओं को नरम हाथों से लिखकर उसमें जान फूक देते है | इनको रेस करना बहुत  पसंद है | शांत स्वभाव के विक्रम कुमार हमेशा अपने चेहरे में ख़ुशी रखना पसंद करते है | हमेशा नई  जानकारी को पाने की कोशिश करते रहते है |  इनको एक्टिंग करना पसंद है | 
"ख़ुशी "

हम तो रौशनी के परिंदे है,
अँधेरे से डरते कहाँ | 
हम मिलते है जिस जगह पर,
खुशियां रहती हैं जहाँ | 
मुश्किलें आएं पर मुस्कराहट
 से लकीर नहीं हटती,
मुस्कराहट रहती है जहाँ पर | 
रौशनी ही है बसती,
चाहे हम हो या तुम हो,
सबके लिए है ये ख़ुशी सस्ती | 
देखो भाई हँसते रहो,
क्योंकि जो खुश रहते है,
वही खुशियां ही है रहती | 
कवि : देवराज ,कक्षा : 7th , अपनाघर हॉस्टल 



कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

रविवार, 7 मई 2017

कवि :मत कर



"मत कर "
ये तो तू मत कर ,
वह तू मत कर | 
 तुझको न रोकेगा वह कि ,
तू प्रकृति से खिलवाड़ | 
हसकर  मत  कर ,
अगर तू  न समझ सका | 
तो रह -रह कर ,
बरसेगा कहर जब उसका | 
तब तुम्हे रहना होगा ,
उस आँचल में | 
बस सहना होगा तुमको मर- मरकर ,
तेज धूप होगी तेज बारिस होगी | 
तेरी वह कहर भरी ,
आवाज से | 
बादल की हॅसने की बारी होगी ,
ये तू मत कर | 
वह तू मत कर ,
प्रकृति से तू खिलवाड़ न कर  | 

                                                                                कविः राज , कक्षा : 8 th  अपना घर 


कवि का परिचय: राज   "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये हमीरपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 8 th  के छात्र है। राज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।                             


शनिवार, 6 मई 2017

कविता : डर

"डर" 

दुनियाँ से परे लोगों से डरे,
रहता हूँ मैं पैरों पे खड़े | 
डर कर जीना मैंने तो सीखा,
पर वही था सबसे बुरा तरीका |   
लोग कहते है की खुल कर जीना चाहिए,
पर कोई नहीं बताता  कब जीना चाहिए | 
जो डरके जी रहे हैं,
वो लोग नहीं बुरे हैं | 
दुनियां से परे लोगों से डरे,
रहता हूँ मैं पैरों पे खड़े | 

कवि :देवराज , कक्षा : 7th अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं देवराज कुमार | ये बिहार राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है | इन्होने अभी तक बहुत सी अचरज भरी कवितायेँ लिख चुके हैं | कक्षा 7th के छात्र हैं | देवराज क्रिकेट के दीवाने है | विराट कोहली के फैन है | देवरज को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको देवराज की रचनाएँ पसंद आएँगी